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parviivrinda
I enjoy reading and writing. My favorite genres are Drama, Fantasy, Historical Fiction, Love, Romance, Feminist Lit. I have been a part of the Kahaniya community since September 16, 2020.
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parviivrinda
निराली
nirali
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शहर की दौड़ धूप से थककर गांव की कदर पहचानी है। धुंए से भरे आसमान को देख याद आई गांव की वो बातें निराली है। बहुत कर ली भागम भाग, अब आराम करने की ठानी है। चलों चले दोस्त अब, हमारे गांव चलने की बारी है। गांव‌ की चौपालों पर अब कहां वो बात पुरानी है पर जो‌ भी हो साहब गांव की इन गलियों ने जान में जान भर डाली है। आंगन में डालकर चारपाई अब हम देख रहे हरियाली है। मेरे गांव की शाम तो आज भी एकदम निराली है। ठंड़े हवा के झोंको ने तो, सारी थकान ही मिटा डाली है‌। आंगनो में चरपाई पर महफिल अभी भी जारी है। मेरे गांव की शाम तो आज भी एकदम निराली है। मेरे गांव की शाम तो आज भी एकदम निराली है

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