English
Download App from store
author
parviivrinda
I enjoy reading and writing. My favorite genres are Drama, Fantasy, Historical Fiction, Love, Romance, Feminist Lit. I have been a part of the Kahaniya community since September 16, 2020.
user
parviivrinda
राम सिया
ram
  28 Views
 
  1 Mins Read
 
  0

यह कैसा खेल नियती का, कि आई विरह की बेला है। जा रही सिया घनघोर  वन को, और राम देख रहा खड़ा अकेला है। एक राजा की रानी होकर भी समाज के तानों को सिय ने झेला है। उन कटु वचनों और अपवादों को, सुन रहा राम देखों खड़ा अकेला है। इस निष्ठुर नियती के कारण यह आई आज कैसी बेला है। एक दूजे के प्राण बसे थे जिनमें, उनसे विरह सिया राम ने झेला है। यह कैसा खेल नियती का, कि आई विरह की बेला है। जा रही सिया घनघोर  वन को, और राम देख रहा खड़ा अकेला है

© All rights reserved


Did you enjoy reading this story? Even you can write such stories, build followers and earn. Click on WRITE below to start.

( )star-unfilled( )star-unfilled( )star-unfilled( )star-unfilled( )star-unfilled
Comments (0)